यह कहानी हमारे समाज के बीच की ही है। इसमें अपने आस-पास की कई लड़कियों का अक्स देखा जा सकता है। इसमें वो सच है, जिससे आँखें चुराने की, उसे नकारने की कोशिश की जाती है। आँखों में सतरंगी सपने लिए एक चुलबुली-सी लड़की ससुराल आती है पर उसके सपने एक-एक कर टूटने लगते हैं और कुछ भयावह स्थितियों का सामना करना पड़ता है। कहीं से कोई सहारा नहीं मिलता। वो कमजोर पड़ जाती है, टूटने लगती है पर फिर हिम्मत कर ज़िन्दगी की बागडोर अपने हाथों में लेती है और बहुत संघर्ष कर, धीरे-धीरे बिखरे टुकड़े समेट ज़िन्दगी को एक नए मुकाम तक ले जाती है और समाज में अपना एक स्थान बना लेती है।