बनारस, एक ऐसा शहर, जहाँ घाटों पर जलती चिताओं के धुएँ में भी कहानियाँ साँस लेती हैं। लेकिन यह कहानी शुरू होती है एक पहाड़ी से, जहाँ आरुष की मुलाक़ात स्नेहा से होती है। धीरे-धीरे प्रेम उसकी दुनिया को ख़ूबसूरत बनाने लगता है, मगर साथ-ही-साथ कुछ अनजानी परछाइयाँ भी उसकी ज़िंदगी का हिस्सा बन जाती हैं। जैसे-जैसे पितृमोक्ष अमावस्या क़रीब आती है, एक नया मोड़ भी उसके साथ आता है- कालचक्र, जीवन और मृत्यु की सरहद पर बना एक पटल, जो न सिर्फ़ कुछ कहानियों का अंत करता है, बल्कि कुछ नई और गहरी कहानियों को जन्म भी देता है। क्या उन कहानियों में डूबकर आरुष उन रहस्यों को सुलझा पाएगा, जो जीवन और मृत्यु दोनों से परे है, जो उसके अस्तित्व के सवालों का जवाब है?