This is an authentic book on Philosophy and Linguistics. Here the recent researches are also included. Here the main topics dealt with are. The origin of language, Phonetics, Phonemix, Phonetic changes, Phonetic laws, Morphology, Syntax, Semantics, Morphological and Genealogical classification of languages. A detailed study of Indian languages, A history of linguistic studies and Palaeography. व्याकरण को व्याधिकारक 'व्याकरणं व्याधिकरणम' कहा जाता है। इसी प्रकार भाषाविज्ञान और भाषाशास्त्र को शिर:शूलकर समझा जाता है---'भाषा-विज्ञानमेतदï् हि शिर:शूलकरं परम', 'भाषाशास्त्र व्याधिकरम'। प्रस्तुत ग्रन्थ में ध्वनिविज्ञान और स्वनिम-विज्ञान विषय पर विशेष महत्त्वपूर्ण सामग्री दी गई है। स्व-निर्मित श्लोकों के द्वारा पारिभाषिक शब्दों आदि की व्याख्या की गई है। इनसे विषय सरलता से स्मरण हो सकेगा। जर्मन, फ्रेंच, चीनी, अरबी आदि भाषाओं के विषय में पर्याप्त उपयोगी सामग्री दी गई है। संस्कृत के प्रामाणिक ग्रन्थों से यथास्थान उपयुक्त उद्धरण प्रस्तुत किये गये हैं। विषय-सूची चित्र-परिचय, अध्याय १ : सामान्य-परिचय, अध्याय २ : भाषा की परिभाषा और विविध रूप, अध्याय ३ : भाषा का स्वरूप, उद्गम और विकास, अध्याय ४ : ध्वनि-विज्ञान, अध्याय ५ : ध्वनि-विचार, अध्याय ६ : पद-विज्ञान, अध्याय ७ : वाक्य-विज्ञान, अध्याय ८ : अर्थविज्ञान, अध्याय ९ : भाषाओं का आकृतिमूलक वर्गीकरण, अध्याय १० : भाषाओं का पारिवारिक वर्गीकरण, अध्याय ११ : आर्य या भारत-ईरानी शाखा, अध्याय १२ : भारतीय आर्यभाषाएँ, अध्याय १३ : भाषाशास्त्र का इतिहास, अध्याय १४ : लिपि का इतिहास, सन्दर्भ-ग्रन्थ, निर्देशिका।